आयुर्वेदिक और हर्बल
श्रीलंका में आयुर्वेद चिकित्सा देश के सदियों पुराने स्वदेशी ज्ञान, प्राकृतिक वातावरण और सांस्कृतिक भंडार पर आधारित है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, मानव सभ्यता 30,000 साल पुरानी है। उस युग के गुफा मानवों ने कई जंगली पौधों को पालतू बनाया और उनका उपयोग भोजन और औषधियों के लिए किया।
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पश्यले नवरत्न कालकाय
पश्यले नवरत्न कालकाय
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आयुर्वेदिक उद्योग में 60 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, पास्याले आयुर्वेद ओसु पारंपरिक औषधियों के निर्माण में एक जाना-माना नाम रहा है, जो स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली बनाए रखने में मदद करती हैं। पास्याले नवरत्न कल्काय पारंपरिक आयुर्वेदिक हर्बल मिश्रण है, जिसे मुख्य रूप से पाचन स्वास्थ्य का समर्थन करने, जठरांत्र संबंधी असुविधा को कम करने और संधिवात दर्द को घटाने में मदद के लिए विकसित किया गया है। इसके चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है, यह कई सामान्य रोगों के लिए एक बहुमुखी आयुर्वेदिक उपाय है।
सामग्री: अजवाइन (Trachyspermum ammi), लौंग (Eugenia caryophyllata), मुलेठी (Glycyrrhiza glabra), मुलेठी की जड़ (Picrorhiza glabra), काला जीरा (Nigella sativa), जीरा (Cuminum cyminum) और मधु।
सामग्री को कल्काय के रूप में जाना जाने वाले पेस्ट जैसी हर्बल तैयारी में मिश्रित किया जाता है, और इसे निम्नानुसार लिया जा सकता है।
खुराक:
- पाचन संबंधी विकार: 125–250 mg अदरक के रस या शहद के साथ लें।
- संधिवात दर्द: बेहतर सूजन कम करने वाले प्रभाव के लिए लहसुन के पानी के साथ लें।
सुरक्षा: व्यक्तिगत खुराक और अवधि के लिए हमेशा किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें। यदि लक्षण बिगड़ते हैं तो चिकित्सक से सलाह लें। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के यह उत्पाद स्तनपान या गर्भावस्था के दौरान अनुशंसित नहीं है। ओवरडोज़ से बचें और निर्धारित खुराक का पालन करें।
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