आयुर्वेदिक और हर्बल
श्रीलंका में आयुर्वेद चिकित्सा देश के सदियों पुराने स्वदेशी ज्ञान, प्राकृतिक वातावरण और सांस्कृतिक भंडार पर आधारित है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, मानव सभ्यता 30,000 साल पुरानी है। उस युग के गुफा मानवों ने कई जंगली पौधों को पालतू बनाया और उनका उपयोग भोजन और औषधियों के लिए किया।
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पस्याले वथा विदुरंगा
पस्याले वथा विदुरंगा
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Pasyale वाथा विदुरंगा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक हर्बल तेल है, जिसे नसों की मजबूती को सहारा देने और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी विकारों से राहत प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह तेल आमतौर पर पक्षाघात, नसों की सूजन और पुराने शारीरिक दर्द जैसी स्थितियों से जुड़ी पीड़ा, कमजोरी, जकड़न और असुविधा को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। प्रामाणिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार तैयार किया गया Pasyale Watha Viduranga रक्त संचार में सुधार करने, बढ़े हुए वात दोष को शांत करने और समग्र शारीरिक शक्ति व गतिशीलता को बढ़ावा देने में सहायक है। यह बाहरी उपयोग के लिए है और दीर्घकालिक आयुर्वेदिक देखभाल में अपने शांतकारी और पुनर्स्थापन गुणों के लिए मूल्यवान माना जाता है।
सामग्री: तिल का तेल (Sesamum indicum), विदुरंगा (Embelia ribes), अदरक (Zingiber officinale), लंबी मिर्च (Piper longum), काली मिर्च (Piper nigrum), रसकिंदा (Tinospora cordifolia), लहसुन (Allium sativum), सेंधा नमक और अन्य पारंपरिक आयुर्वेदिक हर्बल अर्क।
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