आयुर्वेदिक और हर्बल
श्रीलंका में आयुर्वेद चिकित्सा देश के सदियों पुराने स्वदेशी ज्ञान, प्राकृतिक वातावरण और सांस्कृतिक भंडार पर आधारित है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, मानव सभ्यता 30,000 साल पुरानी है। उस युग के गुफा मानवों ने कई जंगली पौधों को पालतू बनाया और उनका उपयोग भोजन और औषधियों के लिए किया।
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राजापुरा सुदर्शन पनिया (200ml)
राजापुरा सुदर्शन पनिया (200ml)
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राजापुरा सुदर्शन पानिया एक ऐसा सस्पेंशन है जो श्रीलंका में अपने पारंपरिक आयुर्वेदिक गुणों के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध है। इसका उपयोग सभी प्रकार के बुखार, सर्दी, खांसी, घरघराहट, गले के संक्रमण तथा वात (वायु), पित्त (पित्त) और कफ (श्लेष्मा) के असंतुलन के लिए किया जाता है। इसकी पारंपरिक स्थानीय जड़ी-बूटियों की समृद्ध संरचना प्रतिरक्षा प्रणाली और शरीर की शक्ति को बढ़ाने में सहायक है।
यह सस्पेंशन ज्वरनाशक, मलेरियारोधी, विषाणुरोधी और सूजनरोधी सिरप के रूप में कार्य करता है तथा इसे वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इससे संबंधित कोई प्रतिकूल दुष्प्रभाव दर्ज नहीं किए गए हैं। राजापुरा सुदर्शन पानिया के प्रमुख घटकों में त्रिफला संयोजन (Terminalia chebula/Terminalia bellirica/Phyllanthus emblica), अदरक (Zingiber officinale), काली मिर्च (Piper nigrum), दालचीनी (Cinnamomum zeylanicum) और मधुमक्खी का शहद शामिल हैं।
सुरक्षा: इसे हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में उपयोग किया जाना चाहिए, विशेष रूप से बच्चों और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए। इसे आधुनिक दवाओं या टीकाकरण के विकल्प के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। संभावित दुष्प्रभावों में कुछ घटकों से एलर्जी प्रतिक्रियाएँ शामिल हो सकती हैं।
मात्रा: वयस्कों के लिए 20 मि.ली. दिन में तीन बार तीन मुख्य भोजन से पहले बच्चों के लिए 10 मि.ली. दिन में तीन बार तीन मुख्य भोजन से पहले
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